Friday, December 9, 2022
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कब्रिस्तान के अंदर है यह स्कूल, कब्रों के बीच रहकर भी बच्चों को नहीं लगता पढ़ाई करने में डर— News Online (www.googlecrack.com)

Agra Graveyard School: शिक्षा की अलख जब जागती है तो न कब्रिस्तान देखा जाता है और न ही शमशान. ऐसा ही एक नजारा आगरा में हैं. यहां पर एक कब्रिस्तान में स्कूल है और उस स्कूल में प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में बच्चे आते हैं और शिक्षा हासिल करते हैं. हालंकि कब्रिस्तान का नाम सुनकर ज्यादातर लोगो के रोंगटे खड़े हो जाते है, लेकिन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे कब्रिस्तान में जाने से न तो डरते हैं. बच्चो में सिर्फ एक ही आस हैं कि उन्हे पढ़ना है.

बता दें कि दर्सगाह-ए-इस्लामी जूनियर हाई स्कूल आगरा के पंचकुइया कब्रिस्तान में है. पंचकुइया कब्रिस्तान को एशिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान भी कहा जाता है. इस स्कूल को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और स्कूल के चारो तरफ कब्रे बनी हुई हैं. इसके बीच में ही स्कूल चलता है और करीब 50 साल से यह स्कूल चल रहा है. आज की बात की जाए तो इस स्कूल में अभी 75 से ज्यादा बच्चे पढ़ते है और 6 टीचर हैं. जो कि बच्चो को हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, अरबी, गणित, साइंस और इतिहास पढ़ाते है. यह स्कूल 1 से 8 तक है, अगर फीस की बात करें तो सिर्फ 50 रुपये प्रति महीना इस स्कूल की फीस रखी गई है. 

खास बात यह है कि इस स्कूल में ज्यादातर गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं. जिनके पिता ढोलक बेचते है, मजबूरी करते है. हालंकि इस स्कूल में सभी धर्मो के बच्चो का एडमिशन हो सकता है, लेकिन सिर्फ मुस्लिम बच्चे ही इसमें एडमिशन लेते है. हिंदू बच्चे कब्रिस्तान के नाम से डर जाते है, इसलिए वह नहीं आते है. दर्सगाह-ए -इस्लामी जूनियर हाई स्कूल के प्रिंसिपल सय्यद शाहीन हाशमी कहते है कि इस स्कूल के सिर्फ गरीब बच्चे पढ़ते है. 50 रुपये स्कूल की फीस रखी गई है और अगर जिस बच्चे के पास 50 रुपये भी नही है तो उससे नही मांगे जाते हैं. कुछ लोगों के द्वारा स्कूल में चंदा दिया जाता है, जिससे स्कूल के टीचर की तनख्वा दे दी जाती है और बच्चो की ड्रेस आ जाती है.
 
वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चो का कहना है कि हम गरीब हैं दूसरे स्कूल जाएंगे तो वह लोग फीस लेंगे लेकिन हमारे पास पैसे नहीं है. शुरू से ही हम इस स्कूल में पढ़े हैं और कब्रिस्तान में स्कूल है लेकिन डर नहीं लगता. दिमाग में सिर्फ एक ही बात रहती है, पढ़ना है और बड़ा आदमी बनना है, यही वजह है कि कभी डरे नहीं.

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